पहले तो कभी ना मिलना हुआ,
पर जब मिले तो लगा
की फिर से मुलाकात हुई,
बातों ही बातों में कुछ अनकही बात हुई |
उसका मुस्कुराना और आँखों से
बहुत कुछ कह जाना,
उसका नज़रें झुकाना और
उन्हें उठा के क़यामत ढाना,
उसकी बातों का मेरे मन में एक धुन छेड़ जाना
और मेरा उस धुन को अक्सर,
गुनगुना के मुस्कुराना |
उसकी प्यार भरी बातों पर
मुझे प्यार आना
मुझे इन सबकी आदत सी
हो गयी थी,
और इस आदत से
एक चाहत सी हो गयी थी |
पर अब सब बेगाना सा लगता है
अपना भी अंजाना सा लगता है
बीता हुआ हर लम्हा,
अब अफसाना लगता है |
कल मैंने उन आफसानो को
कैनवास पर उतारने की कोशिश की
पर अफ़सोस,
अब वे रंग ही नहीं पकड़ते |
Tuesday, January 10, 2012
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