Thursday, May 12, 2011

कभी कभी कुछ लिख लेता हूँ

1.
एक बार अदब के साथ
निकलो तो सही ,
कारवां तो खुद-ब-खुद जुड़ जायेगा |
एक इरादे के साथ कदम तो जरा बढ़ा,
ये जमीं आसमा बन जाएगा ,
ख्वाबों के पतंग उड़ना छोड़,
तभी तू खुद भी उड़ पायेगा |

2.
आज की बारिश ने अरमानो का दरिया बना दिया,
उस दरिया में मैं एक कागज़ की कस्ती तैरा दिया,
उसपे मैंने अपना नाम लिखा था
|

3.
दुनिया की नज़रों में जो चाहत ढूंढते हो,
थोड़ी खुद से भी कर लो तुम,
मत बैठो यूं दीन,
थोडा यकीन खुद पे भी कर लो तुम |

Saturday, May 7, 2011

प्यार के किस्से

हर किसी के प्यार के किस्से ,
कम से कम दो-चार होते हैं |
किस्से तो हमारे भी हैं,
हम भी किसी के लबों के
जिक्र-ए-आम रहे,
पर अफ़सोस ,
की हम कहानी के नायक नहीं ,
बल्कि,
बस एक किरदार रहे |
उसके नैनों के तरकश से
तीर निकले किसी और के लिए ,
पर चौराहे पर खड़े ,
हम क़त्ल-ए-आम हुए |
हर वक़्त मिलना होता ,
पर दोस्तों का भी साथ होता ,
ऐसी महफिलों में
मैं सबसे दूर बैठता ,
क्यूंकि वहां से,
उसे एकटक ताकना आसान होता |
बेतरतीब पड़े हम बिस्तर पे
करवटें बदलते रहे ,
हर करवट के साथ
वह और भी निखर जाती थी ,
और इधर हमारी दुनिया,
थोड़ी सी और बिखर जाती थी |
आज सोचता हूँ की ,
काश मै अपने प्यार को थोड़े लब्ज दे पाता ,
या फिर अपने नैनों की भाषा ही समझा पाता ,
तो फिर आज वेदना नहीं,
बल्कि प्रेम रस के गीत गाता |

Friday, May 6, 2011

कल रात मैं सो न सका

कल रात मैं सो न सका
सुबह होने के इंतज़ार में
रात भर जागता रहा |
अगले दिन
तारे छिप गए ,
पर सूरज ना निकला |
घुप्प अँधेरा ,
अँधेरा ऐसा की ,
साया भी साथ छोड़ गया |
डर के मारे,
मेरी चीख निकल गयी ,
कुछ देर इंतज़ार किया,
फिर सन्नाटे का जवाब आया |
मै फिर से चीखना चाहा
पर आवाज़ सांस में ही अटक गयी,
कुछ देर रुक ,
मैंने सोचने की कोशिश की ,
उस सोच में मैंने
अपनी आवाज़ को खोजने की कोशिश की,
पर वह सोच मस्तिस्क में ही कही भटक गयी |
आज मेरे कमरे की दीवारें भी
मेरे सवालों का जवाब नहीं देती ,
अब तो बस मेरी चुप्पी से ही
मेरी बातें होती है,
आज मेरे लब भी
एक मुस्कुराहट को ,
आइने के मोहताज़ हैं |
और अब उस शीशे की मुस्कुराहट भी ,
लबों को चुभने लगी है |