बंद कमरों में बैठे लोग गणतंत्र दिवस फेसबुक पे मना रहे हैं | और मै उनसे कोई अलग नहीं हूँ क्यूंकि मेरे पास भी और कोई चारा नहीं है, सारा चारा लालू जी ने वर्षों पहले चबा जो लिया था |
वैसे मै जब भी गणतंत्र दिवस के बारे में सोचता हु तो मुझे मेरा बचपन याद आता है| मेरा बचपन एक छोटे से शहर में बीता है और हमारा स्कूल भी वैसा ही था , छोटा | पर उस स्कूल के यादें आज तक ताजा हैं |छबीस जनवरी के दिन सुबह सुबह पौ फटने से पहले ही हम बच्चे प्रभात फेरी पे निकलते थे| जिन्हें प्रभात फेरी न पता हो उन्हें बता दूँ की यह एक जूलूस जैसा होता है जो पुरे शहर का चक्कर काटता है और इसका अंतिम पड़ाव वह जगह होती है जहाँ हमारे राष्ट्रीय झंडे को फहराया जाता है|हमलोग पिछले दिन ही अपने अपने झंडे खरीद लाया करते थे और सुबह सुबह चार बजे नहा के तैयार बैठे रहते थे की कब प्रभात फेरी आएगी | और फिर जब उसमे शामिल हो जाते थे तब अपनी सबसे ऊँची आवाज में नारे लगाते हुए स्कुल तक जाते थे| कुछ नारे आज तक मेरे जुबान पे हैं -- "लाल बाल पाल की "- जय ; "जब तक सूरज चाँद रहेगा , गाँधी तेरा नाम रहेगा" इत्यादि| स्कूल तक पहुँचते पहुँचते गला फट चूका होता था फिर भी जोश में कोई कमी नहीं आती थी | जितना जोश उन दिनों होता था वह आज कही खो गया है , ये सब अब व्यर्थ लगता है | लोग अपने घरो में बैठ के छुट्टियाँ मानते हैं ,कहीं कहीं लोग एक बड़ा सा साउंडबौक्स लगा देते हैं और दिन भर उनपे कानों को फाड़ देने वाले स्वर में देशभक्ति के गाने चलाते हैं | पर , चलो इसी बहाने थोडा देशभक्ति का आलम तो बन जाता है ,एक बार लोग देश नाम की चीज को याद तो कर लेते हैं |
गणतंत्र दिवस के कई मायने हैं , सभी लोगो के लिए अलग अलग |यहाँ हमारे कॉलेज में लोग इसे एक दिन पीस मारने के हिसाब से देखते हैं, सरकारी नौकर इसे एक छुट्टी का दिन मनाते है अपने परिवार के साथ कही पिकनिक मनाते हैं ,और प्रशासन हर साल जनता को गणतंत्र दिवस पर सुनहरे सपने दिखाता है । नए गणतंत्र दिवस पर पुरानी घोषणाओं को भूलकर कर दी जाती है एक नई घोषणा। और ये सारी घोषणाएं अगले गणतंत्र दिवस तक घोषणा ही बनी रहती है|
पर सवाल तो यह है की अगर हम गणतंत्र दिवस याद भी कर लें ,एक दिन के लिए देशभक्ति के स्वर में बोल भी ले तो भी क्या फायदा ? हम एक दिन में अपने देश को बना या बिगाड़ तो नहीं देंगे | बात तो तब होगी जब इस देश का हर नागरिक देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियां जाने ,समझे और उसपे अमल करे| मै मानता हूँ की यह सब कह देना, लिख देना बहुत ही आसान है | पर मेरी यही इच्छा है की कम से कम मेरे ये दो शब्द उस बड़े से साउंडबौक्स की तरह की किसी की कानो में गूँज पैदा करे और कुम्भकर्णी नींद में सोये हुए लोगो को जगाये |
देखा आपने, बात बात में ही कहा पहुँच गया मै !! आज जब कोई प्रभात फेरी नहीं है चिल्लाने को तो मै सोचा की एक ब्लॉग ही लिख डालूं और यह ब्लॉग तो भावनाओं का सरोवर बन गया !!...हह!!
खैर जो भी हो , कम से कम आज भी एक बात तो नहीं बदली ;बचपन में मै दादाजी की जलेबियों का इन्तेजार करता था और आज के डेट में मेस के लड्डू का !!
अंतिम में जय हिंद लिखने की बहुत ही तीव्र इच्छा हो रही है,.....खैर!!
7 comments:
Blog is always best when it is used as a vent to one's overwhelming feelings rather than description of one fine Sunday morning. :) I Liked this post as it shows true alignment of words and flow of your thought.
Great start. Pissu Da :)
JAI HIND!!! JAI HIND !!!
Jai Hind!!
waise mein bhi kuchh alag nahi kar raha hun....facebook pe post ya ek blog pe comment ya "Like".
Shayd ye ek din hota tha unn logon ke liye ek JAJBE ko manane ka, jo woh har waqt dikhate the...aaj jab poore saal woh JAJBA nahi rakhte to ek din ko log kaise manayenge...anyway...IsI JAJBE ke saath ki ek din desh ke liye hum bhi kuchh to jaroor karenge :)
JAI HIND !!!
really....dadaji ki jalebi was one thing i can never forget...well written...keep up d gud start...
ye bahut shudh hindi hai.. jaisa ki mai 10th me padha kartha tha.. katha-sarita me..
bahut hi umda likha hai pissu da...
republic day ki meri bhi bahut yaadein hain... but most prominently.. DD1 pe mai wo parade dekha karta tha.. and school me jalebi milti thi :D
pissu mujhe likhne ka andaaz behad pasand aaya...kaafi sachhe dil se nikla huya laga ye blog....keep it up :)
accha laga Blog......... mein meri Sister ke sath yahi baat kar rahi thi kal....hamare school mein 1 month pehele se practice shuru ho jati thi... march past,dance,songs aur bahoot kuch ..aur mast deshbhaki ke gane bajte the ..Lata Mangeshkarji ka "Vande Mataram "dil ko chu jata tha ...aaisa kuch vatavaran hota tha ki har bachcha sochata tha ki Desh ke liye kuch karunga ..wo white uniform ,flags,parade,proper flag hoisting ,National Anthem ,last mein sweets ...subhe 5...5.30 baje uth jate the... aaj mein khud aaisi ho gayi hu ki 8-9 baj jaye to bhi na uthu us din...sacchi ek holiday banke rahe gaya hai bas Independence Day.
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